Archive for the ‘रामदेव झा’ Category

मोन

रोकि ली ,
इच्छा अछी
छन-छन बढैत ही -धड़कनकें|
भावुक सन छनकें हम
भट्टी मे झोंकी दी |
किन्तु
हाथ पैर शिथिल अछी
बान्हल हो
मोन भरिक जाँत जेना
भारी अछी
चंचल अछी
मोन हमर
तखन की संभव जे
निकुती पर जोखी ली ?

निर्जल मेघ

राशि-राशि मेघ आबि
पड़ायले जाइत अछि
पश्चिम दिस
प्रतीक्षक कें डुबा कऽ
निराशाक सागर मे—
जेना कोनो
फ्लैग स्टेशन पर
कोनो एक्सप्रेस ट्रेन
हड़हाडाइत जाइछ चल |
आ ठाढ, प्लेटफार्म पर
मोसाफिर देखि देखि
ठकुएल रही जाइत अछि |  

फोटोक निगेटिव

फोटोक निगेटिव
निगेटिव
थीक पूज्य,
विश्वसनीय
बैंक हमर |
अतीतक क्षण कोनो
अद्भुत ओ अपरूप सन
पकड़ि कऽ

सेफमे बंद क ऽ

सुरक्षित रखने अछी

काल-तुला

पछिलका पलड़ा जंका अछी
भूत कर आयाम
जाही पर
लादल अनेको बटखरा  सब
भांतिक भातिक
चोट माध्यम और  बड़का
जीवनक भोगल क्षणक आ
अतीतक घटनावली केर
अगिलका पलड़ा जकां  अछी
भविष्यक आयाम
जाही पर लादल अटेडल
अनागति केर ढ़ेरी-
जाहि दिस औत्सुक्य भांवे
दृष्टी लागल नित्य
काँट निकुतिक
बनल अछी इ
वर्तमान निमेश —
बीतल क्षण केर बाद
ओ पुनि
अनागतसँ पूर्व
ओ अपन अस्तित्वमात्रक
दैत अछी संकेत —–

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