Archive for the ‘विवेकानंद ठाकुर’ Category

कालजयी – विवेकानंद ठाकुर

हमर उमेरक

कोनो नहि थाप
कोनो नहि लेखा

जहिया धरि जिनगी
कमाइ छी
कमाइत-कमाइत
गोटेक दिन
टन द’ रहि जाएब
माटिक बासन जकाँ
उमेरक बासन जकाँ

उमेरक हिसाब राखथि
बाबू-भैया
पढ़ुआ-कमौआ
जे भरि दिन रहथि छाहरि मे
हमर उमेरक कोन हिसाब?
माइ केँ पुछलिअइ
एक बेर
अपन उमेर
ओकरो नहि बूझल
माइयो कें नहि बूझल
अपन बेटाक उमेर
ओकरा एतबे मोन
जाइ बरख
घरे-बाहरे
मडुआ भेलइ
ताइ बरख
हमर जनम
एतबे मोन
भूकम्पक साल
जे पहिल-पहिल
पकड़लौँ हरक मूठि
से आइ धरि पकडऩे

एहि बीच
कतेक बाबू-भैया केँ
कतेक पढ़ुआ-कमौआ केँ
काल चिबा गेल
एकटा हम…
जे काले केँ चिबा
आइ धरि
हरक मूठि पकडऩे।

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