Archive for the ‘शेफालिका वर्मा’ Category

अर्पण

तुम आये

किन्तु देर बहुत कर आये

प्रियेतम !

सब साधों को सुला चुकी अब

और करूँ क्या तुमको अर्पण ?

मेरी आँखें सन्यासिन सी

सारे सपने रीते रीते

प्राणों का दीपक रीता

स्नेह रिक्त दीपक से क्या वह

प्रणय.शिखा निकलेगी ??

धरा आकाश भी मिलते हैं क्षितिज में

एक काल्पनिक विन्दु पर

प्रीती की कामायिनी किन्तु ,

खो गयी

अधरों के प्यासे तीरों पर …

तेरे पैर पखारे पाहुन

नयनों के ये नीर पावन

सब कुछ तो लुटा चुकी

ले लो इन आँखों का सावन ….

शेफालिका वर्मा

पानिक कम्पित लहरि पर ,

नै रचू अहाँ इतिहास हमर
पवन-उर्मिक वेगपर नै रचू अहाँ हास हमर
कतेक व्यथा -वाण लागल
काल धनुष पर झूलि कऽ
सांसक लघु लहरि सिहकौलक
संसृतिक फूल कें
रेत केर देवार पर ,आइ सजल उजास हमर

चित्र-अंकित रेख मे नहि जीवनक स्पन्दन
क्षीण सुधि-दीप ज्योतित कोना
स्नेह-वर्तिका आइ अचेतन
प्राणक लघु-निलय मे आइ
मोन उदास हमर

क्षण क्षण परिवर्तित अग-जग
लहरि लहरि मे मौन निमन्त्रण
नीरव निःस्वर पल पल
अहांक उपहारक दर्शन
तुहिन विन्दु सन किसलय
अंचल मे
झरैत कुसुम तारक सन भाव-हृदय
घन श्यामल मे !

भेलौं निःशेष प्रीतिक प्रतीक्षा मे
अनलिखल पाती दऽ रहल छी
समीक्षा मे
एहि अक्षम लेखनी सँ नै लिखू अहाँ
तरास हमर
काल-पत्र पर छविमान सतत
उच्छ्वास हमर
पानिक कम्पित लहरि पर नै लिखू अहाँ
इतिहास हमर……………

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